आर्थिक महत्व

हमारे देश में नियंत्रण उपाय अपनाए जाने के बावजूद वर्ष 1926-31 के टिड्डी चक्र के दौरान, रूढ़िवादी अनुमान के अनुसार, टिड्डियों से फसलों को लगभग 10 करोड़ रूपये की क्षति पहुंची थी। वर्ष 1940-46 और 1949-55 टिड्डी चक्र के दौरान यह क्षति लगभग दो करोड़ रूपये थी तथा 1959-62 के आखिरी टिड्डी चक्र के दौरान यह केवल 50 लाख रूपये थी। यद्यपि वर्ष 1962 के बाद कोई टिड्डी प्लेग चक्र नहीं पाया गया, तथापि वर्ष 1978 और 1993 के दौरान बड़े स्तर पर टिड्डी प्रकोप की सूचना प्राप्त हुई थी। इससे वर्ष 1978 में 2.00 लाख रूपये तथा 1993 में 7.18 लाख रूपये के लगभग क्षति हुई थी।


उसके पश्चात, खाद्य एवं कृषि संगठन के समग्र समन्विय के तहत टिड्डी प्लेग को रोकने के लिए राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीपय संगठनों के प्रयासों के कारण टिड्डी प्रकोप से होने वाली किसी विशेष क्षति के होने की सूचना नहीं मिली है।